What is diode in hindi (part 1)

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What is diode

दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम डायोड के बारे में बात करेंगे,

और यह समझेंगे कि, डायोड क्या होता है। तो आइए जानते हैं।
दोस्तों डायोड हर प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पोनेंट में उपयोग किया जाता है।

वह चाहे आपका मोबाइल हो, या कंप्यूटर हो, या टीवी हो, या फ्रीज हो, या आपका प्रिंटर हो, हर प्रकार के इलेक्ट्रिक व इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्पोनेंट्स में डायोड उपयोग में लिया जाता है। पर यह डायोड होता क्या है, और कैसा दिखता है। इसी बारे में आज हम चर्चा करेंगे।

यह भी देखे

What is the Resistor (Resistor क्या है part 1)

Types of Resistor ( Resistor के प्रकार part 2)

Types of Fixed Resistor (फिक्स्ड Resistor के प्रकार part 3)

डायोड का मुख्य कार्य

दोस्तों डायोड का मुख्य कार्य, किसी भी विद्युत धारा को एक ही दिशा में बढ़ते रहने देना है,

अर्थात अगर हम डायोड को किसी सर्किट में लगा देते हैं,

तो वह करंट को आगे तो जाने देता है। परंतु अगर करंट उसके उलटी दिशा में आना चाहे, तो डायोड करंट को वापस आने से रोक देता है। अगर मैं इस बात को उदाहरण के तौर पर समझाऊं तो यह कुछ इस प्रकार होगा।

आपने वन वे रोड देखा ही होगा।

यह डायोड उस वन वे रोड की तरह है, जहां से हम आगे तो जा सकते हैं,

पर अगर हम उस रोड से वापस आना चाहे, तो पुलिस हमें आगे जाने नहीं देती है।

तो यह ठीक उसी प्रकार का होता है।

डायोड की बनावट (What is diode)

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दोस्तों डायोड के 2 छोर होते हैं। यह इलेक्ट्रोड के बने होते हैं। दोस्तों यह रॉड ना तो सुचालक होते हैं, और ना ही कुचालक। असल में यह रोड अर्धचालक पदार्थ से बने होते हैं। दोस्तों इसमें जो यह दो रोड होते हैं, उसमें से एक प्लस (+) का रॉड होता है, तथा दूसरा रोड (-) का होता है। तथा प्लस वाले रोड को एनोड कहा जाता है, तथा माइनस वाले रॉड को केथोड कहा जाता है। दोस्तों जब हम डायोड के कैथोड को नेगेटिव वोल्टेज से तथा एनोड को पॉजिटिव वोल्टेज के साथ जोड़ते हैं, तो डायोड में करंट का प्रवाह होने लगता है। अर्थात करंट बहने लगता है।

दोस्तों डायोड में करंट दो प्रकार से बहता है। यह दो प्रकार निम्न है :-
(1) फॉरवर्ड बायसिंग
(2) रिवर्स बायसिंग

तो दोस्तों आइए अब हम यह जानते हैं, कि फॉरवर्ड बायसिंग क्या होता है, और रिवर्स बायसिंग क्या होता है।

(1) फॉरवर्ड बायसिंग

दोस्तों जब हम किसी डायोड में कैथोड के सिरे को नेगेटिव वोल्टेज के साथ जोड़ते हैं, तथा एनोड को पॉजिटिव वोल्टेज के साथ जोड़ते हैं, तो इस तरह के विद्युत प्रवाह को फॉरवर्ड बायसिंग कहा जाता है।

(2) रिवर्स बायसिंग

दोस्तों रिवर्स बायसिंग में विद्युत फॉरवर्ड बायसिंग से ठीक उल्टा होता है। जैसे अगर हम डायोड के कैथोड को पॉजिटिव वोल्टेज के साथ तथा एनोड को नेगेटिव वोल्टेज से जोड़ते हैं, तो इस प्रकार की विद्युत धारा का प्रवाह रिवर्स बायसिंग कहलाता है। दोस्तो डायोड को सभी प्रकार के मदरबोर्ड में ” D ” से दर्शाया जाता है, अर्थात यह डायोड सूचक चिन्ह है। जैसा की रजिस्टेंस का R तथा कैपेसिटर C होता है।

दोस्तों अब हम आगे की पोस्ट में डायोड के प्रकार के बारे में विस्तार से जानेंगे।

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